PDS – Public Distribution System क्या है? सार्वजनिक विवरण प्रणाली के बारे में जानकारी |

PDS – Public Distribution System क्या है? सार्वजनिक विवरण प्रणाली के बारे में जानकारी |

PDS – Public Distribution System क्या है? सार्वजनिक विवरण प्रणाली के बारे में जानकारी – वर्तमान समय में संपूर्ण भारत में राशन की दुकानों पर PDS यानी Public Distribution System हैं , लेकिन क्या आपको पता है ? PDS क्या होता है, PDS कैसे काम करता है, तो आइए जानते हैं PDS के बारे में संपूर्ण जानकारी हिंदी में-

PDS – Public Distribution

System क्या है? सार्वजनिक विवरण

प्रणाली के बारे में जानकारी |

भारत सरकार द्वारा संपूर्ण देश में गरीब और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा शहरी कस्बों में राशन की दुकानें खुलवाकर, राशन की दुकानों के जरिए जरूरतमंदों को गेहूं, चावल, दाल इत्यादि उचित दाम पर सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है |

 

पूरे भारत में हर ग्राम पंचायत और शहरी कस्बे में राशन की दुकानें उपलब्ध है | राशन की दुकानों से दाल, चावल, गेहूं इत्यादि आवश्यक वस्तुएं गरीब और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को प्रदान करके आर्थिक रूप से सहायता करना ही सरकार का प्रयास है| लेकिन राशन की दुकानें को चलाने वाले लोग मुनाफाखोरी और कालाबाजारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं | क्योंकि यह लोग गरीबों को उनके हिस्से का अनाज उन्हें कम देते हैं जबकि अन्य लोगों को ज्यादा पैसों के बदले में बेच देते हैं |

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राशन की दुकानों पर हो रही इस कालाबाजारी को को रोकने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही थी , परंतु अब भारत में बढ़ रही टेक्नोलॉजी के चलते राशन की दुकानों पर भी मनमानी करने वालों पर लगाम लग चुकी हैं | दरअसल अब राशन की दुकानों पर अनाज और महत्वपूर्ण सामग्री Technology से लेस PDS द्वारा होती है |

तो आइए जानते हैं PDS के बारे में –

PDS क्या है? PDS kya Hai?

PDS की फुल फॉर्म ” Public Distribution System ” हैं| इसे हिंदी में ” सार्वजनिक विवरण प्रणाली ” कहते हैं , इसके अंतर्गत वही लोग राशन का लाभ उठा सकते हैं जो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गरीब और अन्य पिछड़ा वर्ग की कैटेगरी में आते हैं |

PDS System बढ़ती Technology के कारण ही संभव हो पाया है | इससे राशन की दुकानों पर हो रही कालाबाजारी मुनाफाखोरी और मनमानियां पर लगाम लग चुकी है | अब भारत में राशन की दुकानों पर पी डी एस के जरिए Online राशन का लाभ उठाने के लिए लाभार्थी खुद ही अपना राशन प्राप्त कर सकता है, जबकि पहले ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता था |

PDS के लाभ और कठिनाइयां 

भारत के ग्रामीण और शहरी कस्बा में गरीब लोगों को आवश्यक सामग्री प्रदान करने के उद्देश्य से राशन कार्ड के जरिए खाद्य सामग्री वितरण करवाई जाती है , लेकिन सभी को इसका लाभ नहीं मिल पाता है |

PDS यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अब लाभार्थी अपने हक का पूरा राशन सही मूल्यों पर Biometric Machine के जरिए प्राप्त कर सकता है | दरअसल बायोमेट्रिक मशीन राशन प्राप्तकर्ता का फिंगर प्रिंट मैच ( Finger Prints ) करने पर ही राशन प्राप्त करने की अनुमति देती है | इससे मुनाफाखोरी, कालाबाजारी और राशन की दुकानें चलाने वाले लोग धोखाधड़ी नहीं कर सकते | इसका सीधा फायदा हर उस गरीब को हो रहा है जिसे सरकार आर्थिक मदद करना चाहती हैं |

PDS System के जरिए Biometric Machine की वजह से जिन गरीबों को उनके हक का राशन सही मिल रहा है , वही दूसरी तरफ बायोमेट्रिक मशीन के कुछ Disadvantage भी है | दरअसल Biometric Machine फिंगरप्रिंट Scan करके फिंगरप्रिंट मैच होने पर ही राशन प्राप्त करने की अनुमति देती है | जबकि गरीब और बुजुर्ग लोगों के फिंगरप्रिंट मैच होने की संभावना कम होती है |

क्योंकि वे लोग हर दिन कार्य करते हैं इसकी वजह से उनके फिंगर गिस जाते हैं , इसीलिए उन्हें मोबाइल पर OTP के जरिए राशन लेना पड़ता है और अगर किसी के पास मोबाइल फोन ना हो तो और भी दिक्कत हो जाती है | परंतु अगर बायोमेट्रिक मशीन में कुछ बदलाव करते हुए सरकार ने आधार कार्ड से भी राशन देने की अनुमति जाहिर की है |

PDS की आलोचनाए 

एक तरफ जहां PDS से हर किसी को लाभ मिल रहा है वही एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि शहरी इलाको के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में पीडीएस का संपूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है | क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक राशन की दुकान पर अभी तक PDS की सर्विस नहीं पहुंच पाई है |

दरअसल PDS का संपूर्ण लाभ नहीं मिलने के कारण जरूरतमंदों को खुले बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है जिससे उनके लिए आर्थिक स्थिति और भी गंभीर हो जाती हैं |

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सरकार ग्रामीण और शहरी कस्बों में बसे हुए गरीब लोगों को राशन की दुकानों के जरिए खाद्य सामग्री कम कीमत पर मुहैया करा रही है, परंतु इसके लिए राजकोष पर भी भारी दबाव हो रहा है | फिर भी सरकार गरीबों की आर्थिक सहायता के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैै |

PDS यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली जहां एक तरफ लाभ पहुंचा रही है वहीं दूसरी तरफ इससे कुछ परेशानियां भी उत्पन्न होती है | इसीलिए हाल ही में पांडुचेरी और हरियाणा सरकार ने PDS System को खत्म कर दिया है और भारत सरकार ने भी पीडीएस प्रणाली को खत्म करके डीबीटी DBT प्रणाली को शुरू करने की मंशा जाहिर की है | दरअसल DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थी को ही लाभ पहुंचाया जाएगा | इसीलिए इस पूरी प्रक्रिया को सरकार बहुत ही जल्द पूरे भारत में लागू करना चाहती है |

PDS के उद्देश्य और विस्तार

पीडीएस का मुख्य उद्देश्य भारत में उपभोक्ताओं को कम दरों पर आवश्यक खाद्य सामग्री प्रदान करना है , जिससे गरीब लोगों को आवश्यक खाद्य सामग्री कम कीमत पर मिल सके, जिससे मार्केट में बढ़ रही कीमतों के बोझ से बच सकें |

भारत में राशन की दुकानों पर खासतौर से गेहूं, चावल और दाले सर्वाधिक वितरण की जाती है, क्योंकि गरीब लोगों को दो वक्त का खाना नसीब होने के लिए यही सबसे जरूरी खाद्य सामग्री है | खाद्य सामग्री को वितरण करने के लिए भारतीय नागरिकता कार्ड या राशन कार्ड के अनुसार राशन की दुकानों पर दी जाती है | 

भारत में राशन की दुकानों पर आवश्यक और खाद्य सामग्री का वितरण केंद्रीय खाद्य निगम एफसीआई ( FCI ) के द्वारा किया जाता है | भारत में एफसीआई केंद्रीय खाद्य निगम की स्थापना सन 1965 में हुई थी, जो अभी तक चल रही है | परंतु पहले यह प्रक्रिया पूरी तरह से Offline थी जिसे आप Online किया जा चुका है |

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